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एंटीडिप्रेसेंट लेते समय भावनाओं का फीका पड़ना

एंटीडिप्रेसेंट लेने वाले करीब 46% लोग भावनाओं के फीके पड़ने (emotional blunting) की बात बताते हैं। शोध दिखाता है कि इसे डिप्रेशन से अलग पहचाना जा सकता है।

लेखक: Morten Skovप्रकाशित: अपडेट:
एंटीडिप्रेसेंट लेते समय भावनाओं का फीका पड़ना

एंटीडिप्रेसेंट (डिप्रेशन की दवा) लेते समय बेहतर महसूस करने के बजाय भावनाओं का सपाट हो जाना सबसे आम अनुभवों में से एक है, और सबसे कम चर्चा वाले अनुभवों में से भी। इस पर हुए सबसे बड़े सर्वे में इलाज ले रहे 46% मरीज़ों ने भावनाओं के फीके पड़ने (emotional blunting) की बात कही।

लोग इसे कैसे बताते हैं

भावनाओं का फीका पड़ना न उदासी है, न राहत। लोग बताते हैं कि भावनाएँ दोनों तरफ़ से सिकुड़ जाती हैं: निराशा कम होती है, लेकिन खुशी भी कम, प्यार भी कम, और अपने सबसे करीबी लोगों में दिलचस्पी भी कम। कुछ लोग कहते हैं कि जिन बातों पर कभी उनका मन भर आता था, उन पर अब रोना नहीं आता। दूसरे बताते हैं कि उन्हें लगता है, जैसे वे अपनी ही ज़िंदगी को शीशे के पार से देख रहे हों।

शुरुआत में यह अक्सर अच्छा लगता है, खासकर उस व्यक्ति को जो बहुत गहरे संकट में था। समस्या तब बनती है, जब यह ठीक नहीं होता।

शोध में क्या मिला

गुडविन (Goodwin) और उनके साथियों ने एंटीडिप्रेसेंट ले रहे डिप्रेशन के 669 मरीज़ों का सर्वे किया (अंग्रेज़ी में)। साथ ही तुलना के लिए ठीक हो चुके 150 लोगों (control group) को भी शामिल किया गया। नतीजे 2017 में Journal of Affective Disorders में छपे।

भावनाएँ फीकी पड़ने की बात कही
इलाज ले रहे 46% मरीज़ों ने
पुरुष और महिलाएँ
52% पुरुष, 44% महिलाएँ
दवा के हिसाब से
अलग-अलग दवाओं में कोई फ़र्क नहीं, हालाँकि ब्यूप्रोपियन (bupropion) के साथ यह कम हुआ

इसे डिप्रेशन से अलग पहचाना जा सकता है

उस सर्वे का सबसे काम का नतीजा आसानी से नज़र से छूट जाता है। जिन मरीज़ों का डिप्रेशन काफ़ी हद तक ठीक हो चुका था, यानी Hospital Anxiety and Depression स्केल पर जिनका स्कोर 7 या उससे कम था, उनका भी भावनाओं के फीके पड़ने का औसत स्कोर 35.07 रहा। तुलना के लिए शामिल ठीक हो चुके लोग कोई इलाज नहीं ले रहे थे, और उनका स्कोर 25.73 था।

यानी जिन लोगों का डिप्रेशन काफ़ी हद तक ठीक हो गया था, उनमें भी भावनाएँ फीकी बनी रहीं। अगर दवा लिखने वाले डॉक्टर आपसे कहें कि यह सपाटपन बस आपका डिप्रेशन है, तो इस सर्वे ने उस समूह में, जिसमें डिप्रेशन सबसे कम सक्रिय था, कुछ और ही पाया।

इस अध्ययन के बारे में एक बात जानना ज़रूरी है: इसके सह-लेखकों में दवा कंपनी Servier के शोधकर्ता भी थे। इससे 46% का आँकड़ा गलत नहीं हो जाता, और यह सर्वे अब भी अपनी तरह का सबसे बड़ा है। लेकिन भावनाओं के फीके पड़ने पर हुए शोध का बड़ा हिस्सा दवा उद्योग से मिली फ़ंडिंग से हुआ है, और उसे इसी बात को ध्यान में रखकर पढ़ना चाहिए।

जब यह खत्म नहीं होता

ज़्यादातर लोगों में दवा बंद करने के बाद भावनाओं का फीकापन कम हो जाता है। कुछ लोगों में ऐसा नहीं होता।

भावनात्मक सुन्नपन (भावनाएँ फीकी पड़ जाना) पोस्ट-SSRI सेक्शुअल डिस्फ़ंक्शन (PSSD) के 2022 के निदान के मानदंडों (diagnostic criteria) (अंग्रेज़ी में) में शामिल है। PSSD वह सिंड्रोम है, जिसमें SSRI (सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर) बंद करने के बाद भी यौन और भावनात्मक असर बने रहते हैं। इन मानदंडों में डीपर्सनलाइज़ेशन भी शामिल है, यानी खुद से कटा हुआ महसूस करना, जिसकी बात कुछ लोग इसके साथ-साथ करते हैं।

इससे बना रहने वाला फीकापन चिकित्सा के दायरे से बाहर की चीज़ नहीं रह जाता, बल्कि एक पहचानी गई बीमारी का हिस्सा बन जाता है। यह तब मायने रखता है, जब आप चाहते हैं कि लोग आपकी बात पर यकीन करें।

एक व्यक्ति की ज़ुबानी

निक, यौन और भावनात्मक, दोनों तरह के असर के साथ जीने के बारे में बताते हुए। मरीज़ों के और इंटरव्यू भी देखें।

आप क्या कर सकते हैं

इस पेज पर लिखी किसी बात की वजह से कोई एंटीडिप्रेसेंट बंद न करें।

एकदम से बंद करने पर दवा बंद करने के गंभीर लक्षण (withdrawal) हो सकते हैं। इसका मतलब लत नहीं है, सिर्फ़ इतना कि दवा बंद हुई है। कुछ लोगों में जिस बीमारी के लिए दवा ली थी, वह लौट भी आती है। भावनाओं के फीके पड़ने की बात दवा लिखने वाले डॉक्टर से करना ठीक है, और साथ में इस सर्वे का ज़िक्र करना भी।

अगर दवा बंद करने के बाद भी भावनाएँ फीकी बनी हुई हैं, तो इसकी रिपोर्ट की जा सकती है।

MedDRA कोड 10086208
अंग्रेज़ी शब्द: Post-SSRI sexual dysfunction

दवा नियामक इस सिंड्रोम को इसी शब्द के तहत दर्ज करते हैं, और भावनात्मक सुन्नपन इसके दर्ज लक्षणों में से एक है। रिपोर्ट में जहाँ अपने शब्दों में लिखने की जगह हो (free-text box), वहाँ यही शब्द हूबहू लिखें, फिर हिंदी में, अपने शब्दों में बताएँ कि क्या बदला। MedDRA का कोई हिंदी संस्करण नहीं है, पर कोड हर भाषा में एक ही है। हमारी रिपोर्टिंग गाइड में 66 देशों की जानकारी है।

अगर आपके लिए यह समय मानसिक रूप से बहुत मुश्किल है, तो टेली मानस (Tele-MANAS) को 14416 पर कॉल करें: यह भारत सरकार की मुफ़्त हेल्पलाइन है, जो 24 घंटे, हर दिन, हिंदी समेत 20 भाषाओं में उपलब्ध है।

यह जानकारी डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकती। अपने इलाज के बारे में कोई भी फ़ैसला लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।

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