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Finasteride का अनदेखा पहलू: याददाश्त और दिमाग पर जोखिम

हाल के शोध के आधार पर finasteride से सोचने-समझने की क्षमता पर जोखिम, जिनमें याददाश्त की संभावित समस्या और कोलिनर्जिक तंत्र में गड़बड़ी शामिल हैं।

लेखक: Morten Skovप्रकाशित: अपडेट:
Finasteride का अनदेखा पहलू: याददाश्त और दिमाग पर जोखिम

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फ़िनास्टेराइड का अनदेखा पहलू: सोचने-समझने पर जोखिम और कोलिनर्जिक तंत्र में गड़बड़ी

फ़िनास्टेराइड (finasteride; भारत में Finpecia, Finax और Fincar नाम से मिलती है) आम तौर पर बढ़े हुए प्रोस्टेट (BPH) और गंजेपन (एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया) जैसी समस्याओं के लिए लिखी जाती है, और असरदार होने के लिए इसकी खूब तारीफ़ हुई है। लेकिन बढ़ते प्रमाण इस ओर इशारा करते हैं कि इतनी ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली इस दवा के ऐसे गंभीर जोखिम हो सकते हैं, जिन्हें अब तक कम आँका गया है, खासकर दिमाग के काम पर इसके असर को लेकर। बहुत-से मरीज़ और डॉक्टर दवा के फ़ायदों पर ध्यान देते हैं। पर इसके संभावित साइड इफ़ेक्ट को गहराई से देखें, तो सोचने-समझने की क्षमता के लिए परेशान करने वाले संकेत मिलते हैं।

Ashutosh Ahire et al. (2021) का एक अध्ययन Psychoneuroendocrinology में छपा, जो फ़िनास्टेराइड के सोचने-समझने और व्यवहार पर असर को लेकर गंभीर चिंताएँ उठाता है। इस शोध में देखा गया कि फ़िनास्टेराइड चूहों में जगह और रास्ते सीखने-याद रखने (spatial learning), याददाश्त और सामाजिक समझ (social cognition) पर कैसे असर डालती है। नतीजे कोलिनर्जिक तंत्र (cholinergic system) में संभावित गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं, जो सोचने-समझने की क्षमता का एक अहम हिस्सा है। इन नतीजों को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि ये संकेत देते हैं कि फ़िनास्टेराइड मानसिक स्वास्थ्य के लिए असली खतरा बन सकती है।

न्यूरोस्टेरॉयड, 5-अल्फ़ा रिडक्टेस और दिमाग की सेहत

एलोप्रेग्नानोलोन जैसे न्यूरोस्टेरॉयड (दिमाग में बनने और वहीं काम करने वाले हार्मोन) दिमाग के कई कामों के लिए ज़रूरी हैं, जैसे मूड को संतुलित रखना, सोचने-समझने की प्रक्रियाएँ और तनाव पर प्रतिक्रिया। ये स्टेरॉयड दिमाग में 5-अल्फ़ा रिडक्टेस जैसे एंज़ाइम की मदद से बनते हैं। फ़िनास्टेराइड 5-अल्फ़ा रिडक्टेस को रोककर काम करती है, जिससे एलोप्रेग्नानोलोन जैसे न्यूरोस्टेरॉयड का स्तर घट जाता है।

यही तंत्र DHT (डाइहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन) से जुड़ी समस्याओं के इलाज में फ़िनास्टेराइड के असर की बुनियाद है, लेकिन यही चिंता भी पैदा करता है। न्यूरोस्टेरॉयड का बनना रोकने से दिमाग के काम पर ऐसे असर हो सकते हैं, जिनका इरादा नहीं था और जो खतरनाक भी हो सकते हैं। फ़िनास्टेराइड लेने वाले लोगों में सोचने-समझने में दिक्कत, डिप्रेशन (अवसाद) और एंग्ज़ायटी (लगातार घबराहट और बेचैनी) के मामले क्लिनिकल रिपोर्टों में दर्ज हुए हैं। लेकिन इनके पीछे का तंत्र अब तक साफ़ नहीं था, और यह अध्ययन इसी पर रोशनी डालता है।

अध्ययन: चूहों में सोचने-समझने पर फ़िनास्टेराइड के असर की जाँच

Ahire और उनके साथियों ने इन साइड इफ़ेक्ट को चूहों में दोहराने की कोशिश की, ताकि नियंत्रित माहौल में जाँचा जा सके कि फ़िनास्टेराइड दिमाग के काम को कैसे नुकसान पहुँचा सकती है। इसके लिए Wistar नस्ल के नर चूहों का इस्तेमाल हुआ। उनकी जगह और रास्ते सीखने-याद रखने की क्षमता मापने के लिए उन्हें रेडियल आर्म मेज़ (radial arm maze, RAM) में एक टेस्ट दिया गया, यानी कई रास्तों वाली ऐसी भूलभुलैया, जिसके कुछ ही रास्तों में खाना रखा था। टेस्ट सीख लेने के बाद चूहों को सात दिन तक या तो बिना दवा वाला घोल (vehicle, HPβCD) दिया गया, या 30 या 100 mg/kg की डोज़ में फ़िनास्टेराइड। आठवें दिन जाँचा गया कि उन्हें सीखी हुई बात कितनी याद है।

याददाश्त के अलावा, शोधकर्ताओं ने एक सामाजिक मेलजोल टेस्ट से सामाजिक समझ को भी परखा। इस टेस्ट में मापा गया कि चूहे किसी बेजान चीज़ की तुलना में दूसरे चूहे के साथ कितना समय बिताते हैं। इससे उनके मेलजोल और सामाजिक पसंद के बारे में जानकारी मिली। सोचने-समझने का यह पहलू इंसानों में अक्सर भावनात्मक सेहत से जुड़ा माना जाता है।

व्यवहार के टेस्ट के बाद चूहों को बिना दर्द के मार दिया गया, ताकि दिमाग के अहम हिस्सों में एसिटाइलकोलिनेस्टरेज़ (AChE) की सक्रियता मापी जा सके। AChE एक एंज़ाइम है, जो एसिटाइलकोलीन को तोड़ता है। एसिटाइलकोलीन एक न्यूरोट्रांसमीटर (दिमाग में संदेश पहुँचाने वाला रसायन) है, जो सीखने और याद रखने के लिए बहुत ज़रूरी है। AChE की सक्रियता जाँचकर शोधकर्ता यह पहचानना चाहते थे कि फ़िनास्टेराइड कोलिनर्जिक तंत्र में कोई गड़बड़ी पैदा करती है या नहीं।

चिंताजनक नतीजे: सोचने-समझने में कमी और कोलिनर्जिक तंत्र में गड़बड़ी

इस अध्ययन के नतीजे परेशान करने वाले हैं, और फ़िनास्टेराइड के इस्तेमाल के संभावित खतरों को सामने लाते हैं।

1. याददाश्त में गंभीर कमी:

अध्ययन में पाया गया कि जिन चूहों को फ़िनास्टेराइड की ज़्यादा डोज़ (100 mg/kg) दी गई, उन्होंने RAM टेस्ट में काफ़ी खराब प्रदर्शन किया। इन चूहों ने ज़्यादा गलतियाँ कीं और उनकी याददाश्त में साफ़ गिरावट दिखी, जो सीखी हुई बात को याद करने की क्षमता में गंभीर कमी की ओर इशारा करती है। यह फ़िनास्टेराइड लेने वाले कुछ लोगों की सोचने-समझने से जुड़ी शिकायतों से मेल खाता है, और यह सवाल उठाता है कि क्या ये असर इंसानों में भी हो सकते हैं।

2. सामाजिक समझ में गड़बड़ी:

सामाजिक मेलजोल टेस्ट में, फ़िनास्टेराइड पाने वाले चूहों का मेलजोल चिंताजनक रूप से घट गया। उन्होंने दूसरे चूहे के साथ कम समय बिताया, और किसी जाने-पहचाने चूहे और नए चूहे में कोई पसंद नहीं दिखाई। ये नतीजे इस ओर इशारा करते हैं कि फ़िनास्टेराइड दूसरों को पहचानने और उनसे मेलजोल की क्षमता को कमज़ोर कर सकती है। इंसानों की भलाई में सामाजिक रिश्तों और मेलजोल की अहमियत को देखते हुए, मानसिक स्वास्थ्य पर इसका बड़ा असर हो सकता है।

3. कोलिनर्जिक तंत्र पर दबाव:

जैव-रासायनिक जाँच में पता चला कि फ़िनास्टेराइड ने दिमाग के अहम हिस्सों, जैसे फ़्रंटल कॉर्टेक्स, हिप्पोकैम्पस और सेप्टम में AChE की सक्रियता घटा दी। यह कमी कोलिनर्जिक तंत्र में गड़बड़ी की ओर इशारा करती है, जो सोचने-समझने की प्रक्रियाओं के लिए बहुत ज़रूरी है। याददाश्त और सीखने में एसिटाइलकोलीन की भूमिका को देखते हुए, ये नतीजे संकेत देते हैं कि फ़िनास्टेराइड दिमाग के बुनियादी कामों में दखल दे सकती है, जिससे सोचने-समझने की क्षमता घट सकती है।

फ़िनास्टेराइड पर फिर से सोचना: सोचने-समझने से जुड़े जोखिमों को तौलना

Ahire et al. का अध्ययन हमें इस असहज संभावना का सामना करने पर मजबूर करता है कि फ़िनास्टेराइड कुछ समस्याओं में असरदार होने के बावजूद सोचने-समझने के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। चूहों में याददाश्त की कमी, कमज़ोर सामाजिक समझ और कोलिनर्जिक सक्रियता में गड़बड़ी के प्रमाणों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। खासकर इसलिए, क्योंकि ये उन लक्षणों से मिलते-जुलते हैं जो दवा लेने वाले लोग बताते हैं।

कोलिनर्जिक तंत्र में गड़बड़ी खास तौर पर चिंता की बात है। एसिटाइलकोलीन एक अहम न्यूरोट्रांसमीटर है, जो ध्यान लगाने, सीखने और याद रखने में भूमिका निभाता है। इस तंत्र में गड़बड़ी को अल्ज़ाइमर रोग समेत सोचने-समझने की गंभीर बीमारियों से जुड़ा पाया गया है। फ़िनास्टेराइड इस तंत्र को कमज़ोर करती दिखती है, और यह इस ओर इशारा करता है कि इसके इस्तेमाल से लंबे समय में सोचने-समझने की क्षमता घटने में योगदान हो सकता है। यह ऐसा जोखिम है, जिस पर और शोध ज़रूरी है।

निष्कर्ष: सावधानी की ज़रूरत

फ़िनास्टेराइड सालों से बड़े पैमाने पर लिखी जा रही है, लेकिन इस अध्ययन के नतीजे इस ओर इशारा करते हैं कि सोचने-समझने पर इसके साइड इफ़ेक्ट पहले माने गए से ज़्यादा गंभीर और ज़्यादा व्यापक हो सकते हैं। मरीज़ों और डॉक्टरों को फ़िनास्टेराइड के संभावित फ़ायदों को सोचने-समझने की क्षमता को गंभीर नुकसान के जोखिम के सामने तौलना चाहिए। फ़िनास्टेराइड लेते समय जिन्हें सोचने-समझने या भावनाओं से जुड़े लक्षण महसूस हों, उन्हें तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

यह पूरी तरह समझने के लिए और शोध की सख्त ज़रूरत है कि फ़िनास्टेराइड दिमाग के काम पर किस तरह असर डालती है, और इन असरों को कम करने के तरीके खोजे जाएँ। तब तक फ़िनास्टेराइड के इस्तेमाल में सावधानी को ही मूल सिद्धांत मानना चाहिए, खासकर उन लोगों में, जिनमें सोचने-समझने की क्षमता घटने का खतरा पहले से है।

फ़िनास्टेराइड से सोचने-समझने की क्षमता को लंबे समय तक नुकसान की आशंका को कम करके नहीं आँका जा सकता। न्यूरोस्टेरॉयड और कोलिनर्जिक तंत्र के बारे में हमारी समझ जितनी बढ़ती है, उतनी ही हमारी यह ज़िम्मेदारी भी बढ़ती है कि इलाज सिर्फ़ असरदार ही नहीं, सुरक्षित भी हों। इस अध्ययन के नतीजे साफ़ याद दिलाते हैं कि किसी भी दवा के फ़ायदों को उसके जोखिमों के साथ सावधानी से तौलना चाहिए, खासकर तब, जब ये जोखिम इंसानी दिमाग के नाज़ुक कामकाज से जुड़े हों।

यह जानकारी डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकती। अपने इलाज के बारे में कोई भी फ़ैसला लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।

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