PSSD का जोखिम: पुराने मेडिकल रिकॉर्ड पर आधारित अध्ययन
एक अध्ययन में एंटीडिप्रेसेंट को स्तंभन दोष के ज़्यादा जोखिम और दुर्लभ PSSD से जुड़ा पाया गया। यह पूरी जानकारी देकर सहमति लेने की ज़रूरत दिखाता है।

पुराने मेडिकल रिकॉर्ड पर आधारित एक हालिया अध्ययन (retrospective cohort study) ने सेरोटोनिन पर असर करने वाली एंटीडिप्रेसेंट (डिप्रेशन की दवा) लेने वाले पुरुषों में पोस्ट-SSRI सेक्शुअल डिस्फ़ंक्शन (PSSD) के छोटे, लेकिन अहम जोखिम पर रोशनी डाली है। PSSD यानी SSRI या SNRI एंटीडिप्रेसेंट बंद करने के बाद भी बनी रहने वाली यौन समस्याएँ। 19 साल की अवधि पर फैले इस अध्ययन में 12,302 पुरुष शामिल थे। इसका मकसद यह आँकना था कि इन दवाओं से इलाज के बाद स्तंभन दोष (erectile dysfunction) और PSSD होने की कितनी संभावना है।
नतीजों के मुताबिक, जिन पुरुषों का इलाज इन दवाओं से हुआ, उनमें स्तंभन दोष का जोखिम तीन गुना से भी ज़्यादा है, और उनमें से 0.46% को PSSD हुआ। यह नतीजा दिखाता है कि एंटीडिप्रेसेंट के संभावित, लंबे समय तक रहने वाले यौन साइड इफ़ेक्ट के बारे में खुलकर बात करना ज़रूरी है।
PSSD दुर्लभ है, लेकिन इसके असर गंभीर होते हैं। इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि डॉक्टर और दूसरे स्वास्थ्यकर्मी सेरोटोनिन पर असर करने वाली एंटीडिप्रेसेंट लिखने से पहले मरीज़ों से इन जोखिमों पर बात करें।
पूरा अध्ययन (अंग्रेज़ी में) पढ़ें।
यह जानकारी डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकती। अपने इलाज के बारे में कोई भी फ़ैसला लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।
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