PFS के जेनेटिक कारणों की जाँच
फ़िनलैंड के Tampere University में post-finasteride syndrome (PFS) वाले 150 लोगों के जीनोम की जाँच हो रही है, ताकि PFS की जेनेटिक प्रवृत्ति का पता चले।
यह किसी दूसरे मीडिया संस्थान की रिपोर्ट है। हम इसका लिंक इसलिए दे रहे हैं, क्योंकि यह PFS, PSSD या PAS के बारे में है। इसमें लिखी बातें और राय उस प्रकाशक की हैं, हमारी नहीं।

फ़िनलैंड के Tampere University ने एक अग्रणी अध्ययन शुरू किया है, जिसमें पोस्ट-फ़िनास्टेराइड सिंड्रोम (PFS) के होने में शामिल जेनेटिक कारणों की जाँच की जाएगी। यह शोध Baylor College of Medicine के अहम नतीजों पर आधारित है, जिनमें PFS के मरीज़ों में जीन की सक्रियता (gene expression) में बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। Baylor के शोध ने PFS में “क्या” होता है, इसकी पहचान की थी, जबकि यह नया अध्ययन “क्यों” होता है, यह समझना चाहता है। इसके लिए होल जीनोम सीक्वेंसिंग (Whole Genome Sequencing, WGS), यानी पूरे जीनोम की जाँच, का इस्तेमाल होगा, ताकि संभावित जेनेटिक प्रवृत्ति का पता चल सके।
अध्ययन में PFS के 150 मरीज़ों के जीनोम का विश्लेषण होगा, और उनकी तुलना स्वस्थ लोगों के समूह (control group) से की जाएगी। इस तरीके से शोधकर्ता बीमारी से जुड़े ऐसे जीनोमिक वेरिएंट (DNA में अंतर) भी पकड़ सकते हैं, जो पारंपरिक तरीकों से नहीं दिखते। इससे शायद यह समझ मिले कि कुछ लोगों को PFS क्यों होता है और दूसरों को क्यों नहीं। आखिरी मकसद ऐसे जेनेटिक कारणों की पहचान करना है, जिनसे जानवरों में बीमारी का ज़्यादा सटीक मॉडल बनाया जा सके और मरीज़ों का निदान जल्दी हो सके। इनसे शायद PFS के लिए प्रिसिज़न मेडिसिन (हर व्यक्ति के हिसाब से तय इलाज) तक विकसित हो सके।
शोध टीम का नेतृत्व डॉ. अल्फ़ोंसो उर्बानुच्ची (Alfonso Urbanucci) और प्रोफ़ेसर योहाना श्लॉयटकर (Johanna Schleutker) कर रहे हैं। यह टीम बेहद कुशल है और PFS को समझने के लिए पूरी तरह समर्पित है। इनका काम इलाज के नए तरीकों और इस बीमारी से प्रभावित लोगों को बेहतर मदद का रास्ता खोल सकता है।
इस अध्ययन के बारे में और जानने और चल रहे शोध में मदद करने के लिए PFS Network (अंग्रेज़ी में) की वेबसाइट देखें।
यह जानकारी डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकती। अपने इलाज के बारे में कोई भी फ़ैसला लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।
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