पोस्ट-SSRI सेक्शुअल डिस्फ़ंक्शन (PSSD) से निक का संघर्ष
निक की कहानी दिखाती है कि पोस्ट-SSRI सेक्शुअल डिस्फ़ंक्शन (PSSD) का उन पर और उनके अपनों पर कितना गंभीर और लंबा असर पड़ा है।
निक बताते हैं कि आम तौर पर लिखी जाने वाली एक SSRI (सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर) दवा लेने के बाद पोस्ट-SSRI सेक्शुअल डिस्फ़ंक्शन (PSSD) के साथ उनका अनुभव कैसा रहा। PSSD यानी SSRI या SNRI एंटीडिप्रेसेंट बंद करने के बाद भी बनी रहने वाली यौन समस्याएँ। इस समय उन्हें भावनाओं और जननांगों, दोनों से जुड़ा गंभीर एनहेडोनिया (किसी भी चीज़ में आनंद महसूस न कर पाना) है, जिसका उनकी ज़िंदगी पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
PSSD एक दुर्लभ बीमारी है, जिसमें शारीरिक, तंत्रिका तंत्र से जुड़े (neurological) और यौन साइड इफ़ेक्ट SSRI दवाएँ बंद करने के बाद भी बने रहते हैं। यह सिंड्रोम व्यक्ति को काफ़ी हद तक अक्षम बना सकता है, समाज से काट सकता है, और गंभीर मामलों में आत्महत्या तक ले जा सकता है।
PSSD का असर सिर्फ़ प्रभावित व्यक्ति पर नहीं पड़ता, उसके परिवार और दोस्तों पर भी इसका गहरा असर होता है। यह बहुत ज़रूरी है कि हर किसी को पूरी जानकारी मिले, ताकि वे अपनी सेहत के बारे में सोच-समझकर फ़ैसले ले सकें।
यह जानकारी डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकती। अपने इलाज के बारे में कोई भी फ़ैसला लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।
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