PSSD: एक तकलीफ़देह बीमारी को समझना
PSSD में SSRI बंद करने के बाद भी स्तंभन दोष और जननांगों में संवेदना की कमी बनी रहती है। अध्ययन के मुताबिक इसके लिए खास देखभाल ज़रूरी है।

पोस्ट-SSRI सेक्शुअल डिस्फ़ंक्शन (PSSD): एक तकलीफ़देह बीमारी को समझना
परिचय:
पोस्ट-SSRI सेक्शुअल डिस्फ़ंक्शन (PSSD) यौन स्वास्थ्य की एक बनी रहने वाली समस्या है, जो युवा मरीज़ों को प्रभावित करती है। यह SSRI (सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर) या SNRI (सेरोटोनिन-नॉरएड्रेनालाईन रीअपटेक इनहिबिटर) एंटीडिप्रेसेंट बंद करने के बाद भी बनी रहती है। इसके लक्षणों में स्तंभन दोष (erectile dysfunction), यौन इच्छा की कमी का विकार (hypoactive sexual desire disorder, HSDD), ऑर्गेज़्म (चरम सुख) से जुड़ी समस्याएँ और जननांगों में संवेदना कम होना शामिल हैं, जो 6 महीने से ज़्यादा समय तक रहते हैं।
तरीका:
2009 से 2019 तक के मरीज़ों के मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। मरीज़ों ने अपने लक्षण बताए, IIEF (इरेक्शन की क्षमता मापने वाली एक मानक प्रश्नावली) भरी, और दवा से कराए गए इरेक्शन के दौरान उनका डॉपलर अल्ट्रासाउंड हुआ। संवेदना जाँचने के लिए क्वांटिटेटिव सेंसरी टेस्टिंग (QST) भी की गई।
मुख्य नतीजे:
- मरीज़ों की जानकारी: 43 पुरुष मरीज़ (औसत उम्र 31 साल) PSSD के मानदंडों पर खरे उतरे।
- स्तंभन दोष कितना आम था: 93% मरीज़ों को स्तंभन दोष था, और करीब आधे मरीज़ों में यह गंभीर था।
- रक्त वाहिकाओं से जुड़े नतीजे: 79% मरीज़ों के इरेक्शन वाले ऊतक (erectile tissue) में ऐसी असामान्यताएँ मिलीं, जो फ़ाइब्रोसिस (ऊतक का सख्त होना) की ओर इशारा करती हैं।
- साथ में दिखे लक्षण: HSDD, ऑर्गेज़्म से जुड़ी समस्याएँ और जननांगों में संवेदना कम होना आम था, और 89% मरीज़ों के संवेदना टेस्ट के नतीजे असामान्य थे।
निष्कर्ष:
PSSD वाले मरीज़ों को अक्सर गंभीर स्तंभन दोष, यौन इच्छा में कमी और जननांगों की संवेदना से जुड़ी समस्याएँ होती हैं। ये नतीजे खास देखभाल की ज़रूरत पर ज़ोर देते हैं। डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों को इन लंबे समय तक रहने वाले असर के बारे में पता होना चाहिए, और उन्हें मरीज़ों को यौन स्वास्थ्य के विशेषज्ञों के पास भेजना चाहिए।
ज़्यादा जानकारी के लिए पूरा लेख (अंग्रेज़ी में) पढ़ें।
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