जोसेफ़ विट-डोरिंग: FDA और मनोचिकित्सा पर बातचीत
मनोचिकित्सक और FDA के पूर्व मेडिकल ऑफ़िसर जोसेफ़ विट-डोरिंग कहते हैं कि अमेरिका का दवा नियमन उन्हीं लोगों को नाकाम कर रहा है, जिनकी रक्षा के लिए वह बना है।
यह किसी दूसरे मीडिया संस्थान की रिपोर्ट है। हम इसका लिंक इसलिए दे रहे हैं, क्योंकि यह PFS, PSSD या PAS के बारे में है। इसमें लिखी बातें और राय उस प्रकाशक की हैं, हमारी नहीं।
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FDA के एक पूर्व मेडिकल ऑफ़िसर
जोसेफ़ विट-डोरिंग (Josef Witt-Doerring) मनोचिकित्सक (साइकियाट्रिस्ट) हैं और अमेरिका के दवा नियामक Food and Drug Administration (FDA) में मेडिकल ऑफ़िसर रह चुके हैं। इस इंटरव्यू में उनका तर्क है कि दवाओं की नियामक व्यवस्था उन्हीं लोगों को नाकाम कर रही है, जिनकी रक्षा के लिए वह बनी है।
FDA में अपने अनुभव के आधार पर वे कहते हैं कि दवा कंपनियाँ मेडिकल शोध को प्रभावित करती हैं, विश्वविद्यालयों की मनोचिकित्सा पर हावी हैं और पूरी जानकारी के साथ दी जाने वाली सहमति (informed consent) को तोड़-मरोड़ देती हैं। इंटरव्यू में पोस्ट-फ़िनास्टेराइड सिंड्रोम (PFS) और पोस्ट-SSRI सेक्शुअल डिस्फ़ंक्शन (PSSD) पर भी बात होती है। PSSD यानी SSRI या SNRI एंटीडिप्रेसेंट बंद करने के बाद भी बनी रहने वाली यौन समस्याएँ।
इंटरव्यू में किन बातों पर चर्चा है
YouTube पर वीडियो (अंग्रेज़ी में) को अध्यायों में बाँटा गया है:
- 00:45 मनोचिकित्सा में और FDA में उनका अनुभव।
- 05:30 उनकी राय में, विश्वविद्यालयों की मनोचिकित्सा चीज़ों को जैसा है, वैसा ही क्यों बनाए रखना चाहती है।
- 12:00 उनके मुताबिक दवा कंपनियाँ शोध और मेडिकल शिक्षा को कैसे प्रभावित करती हैं।
- 19:40 वे क्यों मानते हैं कि दवा नियामक दवाओं से होने वाले नुकसान को नज़रअंदाज़ करते हैं।
- 27:00 चिकित्सा में कॉग्निटिव डिसोनेंस (अपनी मान्यताओं से टकराने वाली बात को स्वीकार न कर पाना) की भूमिका, जैसी वे देखते हैं।
- 34:15 PFS और PSSD, और वे क्यों कहते हैं कि इन्हें असली मान्यता की ज़रूरत है।
- 42:00 उनके हिसाब से क्या बदलना चाहिए।
- 50:00 मरीज़ों और आम लोगों से उनकी अपील।
इस इंटरव्यू के लिए जोसेफ़ विट-डोरिंग का शुक्रिया। इसे Moral Medicine ने रिकॉर्ड किया है, जो ऐसी नब्बे से ज़्यादा बातचीत फ़िल्मा चुका है।
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