Milano Project: PFS और PSSD के लिए एक संभावित रास्ता
Milano Project का मकसद PFS और PSSD के इलाज की राह खोजना है। यह शोध बायोमार्कर और न्यूरोस्टेरॉयड पर केंद्रित है।

Milano Project की शुरुआत मिलान विश्वविद्यालय (University of Milan) में हुई है, और इसका नेतृत्व प्रोफ़ेसर रोबेर्तो कोसिमो मेलकांजी (Roberto Cosimo Melcangi), PhD, कर रहे हैं। पोस्ट-फ़िनास्टेराइड सिंड्रोम (PFS) और पोस्ट-SSRI सेक्शुअल डिस्फ़ंक्शन (PSSD), दोनों से प्रभावित लोगों के लिए यह एक अहम कदम है। PSSD का मतलब है SSRI या SNRI एंटीडिप्रेसेंट बंद करने के बाद भी बनी रहने वाली यौन समस्याएँ। यह महत्वाकांक्षी पहल शोध को जानवरों पर होने वाले अध्ययनों से आगे ले जाकर इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल तक पहुँचाना चाहती है। इसका आखिरी लक्ष्य इन जटिल बीमारियों के लिए असरदार इलाज पहचानना है। इस पहल के बारे में आप PFS Foundation की यह खबर (अंग्रेज़ी में) पढ़ सकते हैं।
PFS और PSSD, दोनों के मरीज़ों के लिए Milano Project इन सिंड्रोम के पीछे के तंत्र (mechanism) को गहराई से समझने, और शायद इलाज के नए रास्ते खोजने का एक उम्मीद भरा मौका है। हाल के एक शोध-पत्र में प्रोफ़ेसर मेलकांजी ने PFS और PSSD के बीच संभावित संबंधों की ओर ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक, “सेक्शुअल डिस्फ़ंक्शन PFS और PSSD की एक साझा विशेषता है। यह साझा पहलू संयोग भी हो सकता है, या फिर साझा तंत्रों की वजह से भी। अगर ये तंत्र पहचान लिए जाएँ, तो इनसे यह समझने में मदद मिल सकती है कि ये बीमारियाँ शरीर में कैसे होती हैं (pathophysiology), और शायद इनके इलाज की रणनीतियाँ बनाने में भी।” इस नज़रिए के बारे में आप PFS Foundation की रिपोर्ट (अंग्रेज़ी में) में और पढ़ सकते हैं।
PFS और PSSD की गुत्थी सुलझाने का व्यापक तरीका
Milano Project खास तौर पर इसलिए अहम है, क्योंकि यह PFS और PSSD, दोनों पर काम करता है। इन दोनों बीमारियों में मिलते-जुलते मानसिक, तंत्रिका तंत्र से जुड़े और यौन लक्षण होते हैं। इन सिंड्रोम का एक साथ अध्ययन करके यह प्रोजेक्ट ऐसे साझा रास्ते या इलाज के ऐसे लक्ष्य खोज सकता है, जिनसे इनमें से किसी एक या दोनों बीमारियों वाले मरीज़ों को फ़ायदा हो। यह पहल मेलकांजी की टीम के दस साल से ज़्यादा के शोध पर आधारित होगी। इस टीम ने PFS पर 14 अध्ययन प्रकाशित किए हैं, और इनसे जुटा ज्ञान अब शोध के इस नए दौर की नींव है।
इलाज के संभावित लक्ष्य के रूप में एलोप्रेग्नानोलोन
Milano Project का एक मुख्य फ़ोकस एलोप्रेग्नानोलोन (allopregnanolone) की जाँच है। यह एक न्यूरोस्टेरॉयड (दिमाग में बनने और वहीं काम करने वाले हार्मोन) है, जिसमें PFS और PSSD के इलाज के रूप में काम आने की संभावना है। एलोप्रेग्नानोलोन GABA-A रिसेप्टर के काम को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती है, और इस रिसेप्टर को PFS और PSSD, दोनों से जोड़ा गया है। इसी वजह से यह आगे के अध्ययन के लिए एक उम्मीद भरा विकल्प है। अगर यह शोध सफल रहा, तो इससे ऐसे नए इलाज का रास्ता खुल सकता है, जो खास तौर पर इन सिंड्रोम के पीछे के तंत्रिका-जैविक तंत्र (neurobiological mechanisms) को निशाना बनाएँ।
बायोमार्कर की तलाश
Milano Project का एक सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि यह PFS और PSSD के बायोमार्कर (जाँच में मिलने वाला संकेत) पहचानने पर ध्यान देता है। बीमारियों का निदान करने और उनके पीछे के कारण समझने के लिए बायोमार्कर बहुत अहम होते हैं। PFS और PSSD के लिए एक बायोमार्कर मिल जाए, तो इन बीमारियों का अध्ययन करने की हमारी क्षमता काफ़ी आगे बढ़ जाएगी। एक भरोसेमंद बायोमार्कर से लक्षणों के पीछे की वजहें पहचानना, और उन्हीं पर असर करने वाले इलाज विकसित करना कहीं आसान हो जाएगा।
Milano Project, PFS और PSSD को समझने और इनका इलाज खोजने की दिशा में एक अहम कदम है। दोनों बीमारियों पर एक साथ ध्यान देकर यह प्रोजेक्ट ऐसे साझा तंत्र खोज सकता है, जिनसे असरदार इलाज तक पहुँचा जा सके। अगर आप इस अहम काम में साथ देना चाहते हैं, तो हमारे दान पेज पर जाएँ और Milano Project में योगदान दें।
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आखिर में, कोई भी साइड इफ़ेक्ट अपने देश के दवा नियामक को रिपोर्ट करना बहुत ज़रूरी है। इन कमज़ोर कर देने वाली बीमारियों को मान्यता दिलाने और इन पर आगे शोध के लिए यह कदम ज़रूरी है। Propecia यानी फ़िनास्टेराइड (finasteride; भारत में Finpecia और Finax), या SSRI (सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर) दवाओं से हुए साइड इफ़ेक्ट कैसे रिपोर्ट करें, इसकी और जानकारी साइड इफ़ेक्ट रिपोर्ट करने की हमारी गाइड में है।
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